क्या आप जानते हैं, आर्यभट्ट ने नहीं अपितु वेदों में हुई थी शुन्य की खोज

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Aryabhatt discover Zero ( Shunya ), Hindi

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एक प्रसिद्ध गाने के बोल हैं की जब जीरो दिया मेरे भारत ने, दुनियां को तब गिनती आई. लेकिन क्या आप जानते है की शुन्य का आविष्कार किसने किया? बहुत से लोगो के अनुसार आर्यभट ने शुन्य की खोज की लेकिन वास्तव में शुन्य की खोज आर्यभट्ट ने भी नहीं की थी? तो फिर शुन्य की खोज किसने की? इन्ही सब सवालों के लिए पढ़े आज की हमारी यह पोस्ट:

भारत प्राचीन काल में बहुत सांस्कृतिक और वैज्ञानिक था। भारत ने तमाम तरह के अविष्कार किये थे। यह बहुत ही निराशाजनक बात है कि आज भारत का युवा बहुत कमजोर हो रहा है, सनातन संस्कृति की धरा अब पतित सी हो रही है। आज जानिए की शुन्य की खोज किसने की थी।

 

आजकल फेसबुक और व्हाट्सऐप पर एक पोस्ट देखने को मिलती है :

शून्य की खोज आर्यभट्ट ने 5 वीं सदी में की तो द्वापरयुग में 100 कौरवों की गणना ,और त्रेतायुगमें रावण के 10 सिरों की गणना किसने की ??
अब लोग ये नहीं समझते ऐसे पोस्ट हमारे शास्त्रों पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं इसका उद्देश्य क्या है ??

सम्भव है शास्त्रों को आर्यभट्ट का परवर्ती सिद्ध करना।

 

http://caindiainfo.com/page/2/?q=viagra-canada-rx अब बताते हैं शून्य की खोज किसने की तो वो हैं वेद ।

वेदों में 1 से लेकर 18 अंकों तक (इकाई से परार्ध ) की गणना की गयी है । 1 के अंक में 0 लगाने पर ये गणना क्रमशः बढ़ती जाती है इस का स्पष्ट उल्लेख वेद भगवान् करते हैं

‘इमा मेऽअग्नऽइष्टका धेनव: सन्त्वेका च दश च शतं च शतं च सहस्रं च सहस्रं चायुतं चायुतं च नियुतं च नियुतं व नियुतं च प्रयुतं चार्बु दं च न्यर्बु दं च समुद्रश्च मध्यं चान्तश्च परार्धश्चैता मेऽअग्नऽइष्टका धेनव: सन्त्वमुत्रामुष मिंल्लोके ।। (शुक्ल यजुर्ववेद १७/२)

अर्थात् – हे अग्ने । ये इष्टकाऐं (पांच चित्तियो में स्थापित ) हमारे लिए अभीष्ट फलदायक कामधेनु गौ के समान हों । ये इष्टका परार्द्ध -सङ्ख्यक (1०००००००००००००००००) एक से दश ,दश से सौ, सौ से हजार ,हजार से दश हजार ,दश हजार से लाख ,लाख से दश लाख ,दशलाख से करोड़ ,करोड़ से दश करोड़ ,दश करोड़ से अरब ,अरब से दश अरब ,दश अरब से खरब ,खरब से दश खरब ,दश खरब से नील, नील से दश नील, दश नील से शङ्ख ,शङ्ख से दश शङ्ख ,दश शङ्ख से परार्द्ध ( लक्ष कोटि) है ।

यहाँ स्पष्ट एक एक शून्य जोड़ते हुए काल गणना की गयी है ।

 

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अब फिर आर्यभट्ट ने कैसे शून्य की खोज की ?

इसका जवाब है विज्ञान की दो क्रियाएँ हैं एक खोज (डिस्कवर ) दूसरी आविष्कार (इन्वेंट) । खोज उसे कहते हैं जो पहले से विद्यमान हो बाद में खो गयी हो और फिर उसे ढूढा जाए उसे खोज कहते हैं ।

आविष्कार उसे कहते हैं जो विद्यमान नहीं है और उसे अलग अलग पदार्थों से बनाया जाए वो आविष्कार है ।

अब शून्य और अंको की खोज आर्यभट्ट ने की न कि आविष्कार किया

इसका प्रमाण सिंधु -सरस्वती सभ्यता (हड़प्पा की सभ्यता) जो की 1750 ई पू तक विलुप्त हो चुकी थी में अंको की गणना स्पष्ट रूप से अंकित है।

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GyanPanti Team

पुनीत राठौर, www.gyanpanti.com वेबसाइट के एडमिन हैं और यह Ad Agency में बतौर आर्ट डायरेक्टर कार्यरत हैं. इन्हें नयी-नयी जानकारी हासिल करने का शौक हैं और उसी जानकारी को आपके पास पहुचाने के लिए ही है ब्लॉग बनाया गया हैं. आप हमारी पोस्ट को शेयर कर इन जानकारियों को बाकी लोगो तक पहुचाने में हमारी सहायता कर सकते हैं.

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