क्या हैं सूर्य को जल चढ़ाने का वैज्ञानिक कारण

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Kyo chadate hai Surya ko Jal- ek tathy, hindi

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क्या हैं सूर्य को जल चढ़ाने की वैज्ञानिक मान्यता, क्यों चढाते हैं सूर्य को जल, आखिर सूर्य को जल चढाने के क्या फायदे होते हैं? इन्ही सब सवालों के जवाब आपको मिलेंगे आज की हमारी इस पोस्ट में:

सनातन संस्कृति अत्यंत प्रचीन संस्कृति है, माना जाता है कि हमारे पुर्व के श्रषि-मुनि खुद शोध किया करते थे। उन्हीं शोधो को फिर लिखकर मानव जीवन को बताते थे। वेद, पुराण, और सभी ग्रंथ इसी का एक सार हैं। मनुष्य अपने कर्तव्यों को कभी ना छोड़े इसलिए इन ग्रंथो का निर्माण किया गया था। आज हमारे यही ग्रंथ हमें सदबुद्धि प्रदान करते हैं, और हमें अपना निहित कर्तव्य बताते हैं। वेदों में एक और बात कही गई है कि हमें हर रोज प्रातकाल: सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए। हम सभी यह करते हैं पर बहुत से कम लोग ही इसका वैज्ञानिक कारण जानते होंगे। इसलिए आज फिर हम आपको इसका वैज्ञानिक कारण बताने जा रहे हैं।

सूर्य हमारे लिए वैज्ञानिक दृष्टि में एक तारा है जो हमेशा अग्नि से दधकता रहता है। सूर्य के आने वाले प्रकाश से ही हमारा दिन शुरू होता है, सूर्य हमारे लिए बहुत महत्व रखता है , हर प्राणी औऱ प्रजाति को सूर्य की किसी ना किसी रूप में आवश्यकता होती है।

पेंड-पौधे सूर्य से अपना भोजन पाते हैं, इंसान सूर्य की रोशनी में प्रफुल्लित होकर नये दिन का अारंभ करता है। सभी प्रकार के काम सूर्य से ही होते हैं। सूर्य का प्रकाश हमारे लिए इतना महत्व रखता है कि बिना इसके हमारी पृथ्वी की कल्पना भी नहीं करी जा सकती है। प्राचीन मुनियों ने इसी दान को ध्यान में रखते हुए सूर्य को जल चढ़ाने की विधि आरंभ की थी।

 

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सूर्य पर जल चढाने का कारण(वैज्ञानिक तर्क) :

अगर सूर्य को जल देने की बात करें तो इसके पीछे छिपा है रंगो का विज्ञान।मानव शरीर में रंगो का संतुलन बिगड़ने से भी कई रोगों के शिकार होने का खतरा होता है।

सुबह के समय सूर्यदेव को जल चढाते समय शरीर पर पड़ने वाले प्रकाश से ये रंग संतुलित हो जाते हैं। (प्रिज़्म के सिद्दांत से) जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति बढ़ जाती है।

इसके आलावा सूर्य नमस्कार की योगमुद्रा होने से एकाग्रता बढ़ती है। मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी) की कई बीमारी सही होती हैं।आँखों की कई समस्या दूर होती हैं।

सूर्य की रौशनी से मिलने वाला विटामिन D शरीर में पूरा होता है। आपका मुखमंडल ओजस्वी होता है त्वचा के रोग कम होते हैं। प्राकृतिक संतुलन भी बनता है।(यही जल वाष्पीकृत हो कर, वर्षाजल का अमृत बनकर वापस मिलता है)

इन्ही कारणों से हम सूर्य देव का जल चढ़ाकर अभिनंदन करते हैं , और वह हमें आशीर्वाद देते हैं।

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पुनीत राठौर, www.gyanpanti.com वेबसाइट के एडमिन हैं और यह Ad Agency में बतौर आर्ट डायरेक्टर कार्यरत हैं. इन्हें नयी-नयी जानकारी हासिल करने का शौक हैं और उसी जानकारी को आपके पास पहुचाने के लिए ही है ब्लॉग बनाया गया हैं. आप हमारी पोस्ट को शेयर कर इन जानकारियों को बाकी लोगो तक पहुचाने में हमारी सहायता कर सकते हैं.

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