जानिये घडी की सुइयों के घुमने के पीछे का रोचक राज

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Special Mystery On Clockwise Clock in Hindi

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3. एक प्रहर तीन घंटे या साढ़े सात घटी का होता है। एक घटी 24 मिनट की होती है। दिन के चार और रात के चार मिलाकर कुल आठ प्रहर। ये समय सूर्य की रोशनी और चांद की चाल पर निर्धारित था। आज भी उजले और अंधेरे पक्ष(पाख) के बारे में हम सभी जानते हैं। समय की ये गणना तो भारतीय हुई, जिसमें हमें किसी घड़ी की जरूरत ही नहीं थी। और फिर जब जरूरत पड़ी भी तो हमारे यहां सौर घड़ी आ गई।

 

4. सौर घड़ी के अलावा हमारे यहां चंद्रमा की चाल के हिसाब से भी समय देखा गया। अगर उजाले पक्ष की चौथ है, तो सूर्य ग्रहण के बाद चौथे घंटे में चांद दिखता था। अष्टमी है तो पूरे 8 घंटे बाद। और एक बात, घंटों की गणना भी भारत की ही देन है, इसीलिए चंद्र पंचांगों की गणना सौर पंचांग से सटीक मानी जाती थी। खैर, सौर-चंद्र के बाद हम घड़ियों की दिशा की बात करते हैं, जिन्हें आगे की स्लाइड्स में विस्तार से समझाया गया है।

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