सम्मोहन सीखे : शक्ति चक्र से पाएं सम्मोहन शक्ति | Shakti Chakra Facts in Hindi

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How to use Shakti Chakra for Learn Hypnotism

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सम्मोहन सीखे : शक्ति चक्र से पाएं सम्मोहन शक्ति | Shakti Chakra Facts in Hindi : पाठकों, आपने पिछली पोस्ट में त्राटक के बारे में संक्षिप्त रुप से जाना और आज हम आपको त्राटक के ही एक प्रमुख भाग शक्ति चक्र के बारे में विस्तृत रुप से बताने जा रहे हैं. जो निश्चित ही सम्मोहन सीखने की प्रक्रिया में आपके बहुत ही आएगा.

शक्ति चक्र के बारे में बताने से पहले हम आपको बता देना चाहते हैं कि प्राणायाम सम्मोहन का एक प्रमुख अंग है तथा कुछ दिनों के प्राणायाम के अभ्यास के बाद ही त्राटक का अभ्यास करना चाहिए. जब आपको प्राणायाम का अभ्यास करते हुए कुछ समय हो जाए तो इसके पश्चात शक्ति चक्र पर अभ्यास करना जरुरी है क्योंकि शक्ति चक्र के अभ्यास के द्वारा ही साधक की आंखों में चुंबकीय शक्ति आती है और इस प्रकार चुंबकीय शक्ति के पैदा होने से उसके मन की एकाग्रता बढ़ जाती है, जिससे आप सम्मोहन में सफल होते हैं.

वास्तव में शक्ति चक्र के द्वारा ही आंखों में चुंबकीय शक्ति बढ़ती है. फलस्वरूप उसके मन की एकाग्रता बढ़ जाती है, जिसके कारण साधक पूरी शक्ति के साथ अपना कार्य कर पाता है तथा अपने मन के अनुसार सफलता हासिल करने में सक्षम होता है.

जैसा कि ऊपर बता दिया गया है कि शक्ति चक्र के माध्यम से आंखों की चुंबकीय शक्ति को बढ़ाया जा सकता है तो इसलिए शक्ति चक्र का अभ्यास करने के लिए एक ऐसा कमरा चुनना चाहिए जो कि एकांत में हों तथा जिसमें ताजी हवा तथा पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था हो. तथा जहां पर शक्ति चक्र का साधक कुछ समय बैठकर शांति से अपना अभ्यास कर सके.

शक्ति चक्र पर अभ्यास के लिए शक्ति चक्र की आवश्यकता होती है. यह चक्र अमेरिका में तथा यूरोप में अलग तरीके से निर्मित किया जाता है तथा ग्रीक पद्धति के अनुसार इसका निर्माण अलग तरीके से होता है लेकिन दोनों का प्रभाव एक जैसा ही होता है. शक्ति चक्र आप नीचे बनी फोटो में भी देख सकते हैं.

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किसी सफेद मोटे कागज पर इस प्रकार का शक्तिचक्र काली स्याही से बना लेना चाहिए और जहां साधक बैठता है उसकी आंखों के ठीक सामने दीवार पर कील ठोककर इस चक्र को टांग देना चाहिए तथा उसके सामने लगभग दो या तीन फिट की दूरी पर मोटे आसन पर साधक को बैठ जाना चाहिए.

इसके पश्चात शक्ति चक्र पर अपनी आंखें स्थिर कर त्राटक का अभ्यास करना चाहिए. लेकिन इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि आपको अभ्यास तभी तभी करना चाहिए जब आप स्वस्थ हों, थके हुए ना हो, प्रसन्नचित्त हो तथा आपके मस्तिष्क में किसी प्रकार की परेशानी और समस्या ना हो.

शक्ति चक्र के अभ्यास के लिए आसन पर बैठकर आपको अपना शरीर पूरी तरह से ढीला और शिथिल छोड़ देना चाहिए. अपने आपको आपको ऐसा आभास देना चाहिए जैसे कि आप बहुत हल्के और समुद्र की लहरों पर बैठे हैं. इसके साथ ही साथ प्रयास करके अपने मन से इधर उधर के सारे विचारों को निकाल देना चाहिए तथा अपने मित्रों को पूर्ण क्षमता के साथ उस शक्ति चक्र पर केंद्रित कर लेना चाहिए.

 

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GyanPanti Team

पुनीत राठौर, www.gyanpanti.com वेबसाइट के एडमिन हैं और यह Ad Agency में बतौर आर्ट डायरेक्टर कार्यरत हैं. इन्हें नयी-नयी जानकारी हासिल करने का शौक हैं और उसी जानकारी को आपके पास पहुचाने के लिए ही है ब्लॉग बनाया गया हैं. आप हमारी पोस्ट को शेयर कर इन जानकारियों को बाकी लोगो तक पहुचाने में हमारी सहायता कर सकते हैं.

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