कहीं यह तीसरे विश्वयुद्ध की तैयारी तो नहीं ? पुलमावा आंतकी हमला।

Share

जो कुछ भी घटित हो रहा है, उसमे ऐसा बहुत कुछ है जिसको आपने देखना है, सुनना है और समझना है। 
कहीं यह तीसरे विश्वयुद्ध की तैयारी तो नहीं ?
यदि हाँ तो इस युद्ध में भारत कहाँ है?

इसमें तो कोई संदेह नहीं कि भारत का हिन्दू देशद्रोही नहीं। लेकिन क्या वह किसी युद्ध के लिए तैयार है ?
आप लोग कहेंगे कि युद्ध तो सेनाएं लड़ती हैं सीमा पर और यही आपकी गलती है। इस बार युद्ध यदि हुआ तो एक अलग तरह से होगा। 
यह तो हमारा सौभाग्य है कि ऐसे कठिन समय में मोदी जी जैसा व्यक्ति देश का नेतृत्व कर रहा है नहीं तो विदेशी महिला के हाथ के नीचे चलती सरकार ने तो देश की सेनाओं की कमर तोड़कर रख दी थी। यदि याद नहीं तो मैं याद दिलाता हूँ कुछ !
Abusing any person, relegion or cast is unacceptable . Such a person will be blocked immedeatly .

loading...

सोनिया कांग्रेस के सत्ता हस्तांतरण से पूर्व, जबकि वह चुनाव हार चुके थे, अकस्मात् थलसेनाध्यक्ष तथा उच्चतम न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कहीं आपको अचम्भे में नहीं डाला? कांग्रेस के चुनाव हारने से कुछ ही समय पूर्व नौसेना की पनडुब्बियों में एक के बाद एक दुर्घटना क्या स्वाभाविक थी?
कांग्रेस राज में एक एक बाद एक वैज्ञानिकों द्वारा आत्महत्या या गायब हो जाना स्वाभाविक था?

और अब जो हो रहा है क्या वह स्वाभाविक है ?
क्या हो रहा है अब? 
हिन्दू को अशक्त करने के लिए उसके टुकड़े किये जा रहे हैं। 
दलित – दलित का खेल अब ज़ोर पकड़ रहा है। इंदिरा गांधी के समय सिख और हिन्दू को एक से दो किया गया और अब दलित को भी सवर्णो के विरुद्ध खड़ा किया जा रहा है। नहीं तो क्या कारण है कि कन्हैया जो कुछ समय पूर्व कहता था कि वह भारत के संविधान का आदर करता है अकस्मात् देश विरोधी नारे लगाने लगा? क्या कारण है कि राहुल-कजरी- मुल्ला यादव- नितीश, लालू आदि एक स्वर में दलित-दलित खेलने लगते हैं? क्या कारण है कि हर विरोधी पक्ष का नेता अब इस खेल में कूद पड़ा है? क्या आपको लगता नहीं कि यह एक सोची समझी योजना के अंतर्गत हो रहा है?

तनिक स्मरण कीजिये महाभारत को :
महाभारत के युद्ध से पूर्व श्री कृष्ण ने किस तरह अर्जुन को हर कला में निपुण होने को कहा, तरह-२ के अस्त्र-शास्त्रों से सुसज्जित होने को कहा और किस तरह कारण से उसके कवच-कुण्डल तथा बर्बरीक से उसकी गर्दन ले ली।

क्षमा चाहता हूँ, ब्राह्मण वर्ग महाभारत पढता तो रहा पर उसको इसमें से स्वयं शिक्षा लेने की आवश्यकता कभी नहीं लगी। वह सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण के समय भी निष्क्रिय सेना की प्रतीक्षा कर रहा था और आज भी वैसा ही है। बुरा मत मानना मित्रों, हर हिन्दू – मुस्लिम दंगे में आप लोगों ने सिद्ध किया है यह।

यह बात मानता हूँ कि आपको अनावश्यक लड़ाई में घसीटना तथा उसके लिए प्रेरित करना इतना सरल नहीं जितना अन्य वर्गों को है, लेकिन आप लड़ाई में आ भी जाएँ तो क्या करेंगे? गीता तो पढ़ी पर समझी नहीं। यदि समझी होती तो आज भारत के हर मंदिर में साईं की मूरत न लगी होती। यह एक प्रमाण ही काफी है आपकी निष्क्रियता को समझने के लिए।

दूसरी ओर तथाकथित दलित हर समय लड़ने को तैयार होता है। इनके घर पर औज़ार के नाम पर ही हथियार मिल जाते हैं। कुछ न हो तो लोहार के पास हथोड़ा और किसान के पास फावड़ा तो होता ही है। लकड़हारे के पास कुल्हाड़ी अवश्य मिलेगी। जब सेना देश की सीमा पर लड़ रही होगी तो यही तथाकथित दलित देशद्रोहियों से देश के अंदर लड़ेंगे। और यहीं खेल शुरू होता है सोनिया और उसके सहयोगियों का।

आज एक ओर सिखों को अलग करने का पूर्ण षड्यंत्र चल रहा है जिसके लिए कजरी और उसकी टीम पंजाब पहुँच ही गई है तो दूसरी ओर हर प्रदेश में दलितों को देश की मुख्यधारा से अलग करने का प्रयत्न किया जा रहा है। इन परिस्थितियों में हिन्दू संख्या में अधिक होने के पश्चात भी टूटकर अशक्त होने जा रहा है और इसको रोकना पड़ेगा। 
पर रोकेगा कौन? वह जो फ्री वाई फाई के लिए वोट देता है ? वह जो एक रूपया किलो गेहूं और २ रुपये किलो चावल के लिए वोट देता है? वह जो मुफ्त के लैपटॉप या मिक्सर के लिए वोट देता है?
वह जिसकी टैक्स देने के नाम पर, हिसाब रखने के नाम पर नानी मरती है? 
क्या उस खोखले देशप्रेमी से कुछ आशाएं रखी जा सकती हैं ?

ध्यान रहे ! देश विनाश के किनारे खड़ा है। यह बात मैं जर्मनी में बैठकर नहीं अपितु हिमालय से कन्याकुमारी, ओखा से मुंबई, गोवा से पूरी घूमने के पश्चात, ५०००० किलोमीटर के भारत भ्रमण के उपरांत कह रहा हूँ। अब नहीं सम्भले तो समय नहीं मिलेगा।

सम्भालो अपने देश को ! दलितों को हिन्दुओं से अलग करने वाली, दलितों को और दलित बनाने वाली, दलित-२ खेलने वाली हर शक्ति को मुंहतोड़ उत्तर दें। कानून मुझे आज्ञा नहीं देता कि मैं इस से अधिक कुछ लिख सकूँ। . 
हर देशद्रोही का और उसका पक्ष लेने वाले का अंत आवश्यक है। फिर चाहे इसके लिए आपातकाल ही क्यों न लगाना पड़े। 
और सबसे अधिक उत्तरदायित्व ब्राह्मण वर्ग का है और मेरा मानना है कि आज जो परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं उसका एक बड़ा कारण ब्राह्मण है और इन परिस्थितियों को ठीक भी वही कर सकता है। जो काम एक सरकार नहीं कर सकती वह आप कर सकते हैं।

“किसीने mere liye कहा था, सूट बूट पहनने वाले, काल चश्मा लगाने वाले धर्म की बातें करें तो अच्छा नहीं लगता” तो उनko और उनके जैसे हर व्यक्ति को कहना चाहूंगा क जब आप अपना कर्त्तव्य भूलेंगे तो हमें ही kuchh करना पड़ेगा। आप अपना कार्य ठीक से करें, अपने कर्तव्यों का पालन करें और हम आपके चरणों में शीश नवाते हुए आपकी आज्ञा का पालन करने को तत्पर हैं. ठीक वैसे ही जैसे पहले होता था। हर चक्रवर्ती सम्राट भी ऋषियों के आगे शीश झुकाता था।

और यही बात मैं हिन्दू नेताओं से, विभिन्न धर्माचार्यों से भी कहना चाहता हूँ, निवेदन करना चाहता हूँ कि इस समय अपना व्यक्तिगत लाभ छोड़कर देश और धर्म को एक करने के काम में जुट जाएँ। आपकी निष्क्रियता, अहंकार तथा लोभ देश को बहुत महंगा पड़ेगा और हम इसका मूल्य सदियों तक नहीं चुका पाएंगे।

देश को, सनातन समाज को एक बार फिर से दासत्व से बचाओ।

जय श्री राम !!

अनिल अरोरा – जर्मनी

loading...

Comments

Comments Below

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close