सम्मोहन सीखे : तीसरे नेत्र के लिए जरूरी हैं मूर्ति त्राटक | Learn Hypnotism

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Learn Hypnotism : Murti Tratak for Third Eye

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सम्मोहन सीखे : तीसरे नेत्र के लिए जरूरी हैं मूर्ति त्राटक | Learn Hypnotism : Murti Tratak for Third Eye : दोस्तों! कुछ समय पहले हमने आपको पाठकों के त्राटकों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी थी. त्राटक मुख्यतः 9 प्रकार के होते हैं तथा इन सभी त्राटकों में सफलता प्राप्त करना ही पूर्णता प्राप्त करना माना जाता है. आज हम इन 9 त्राटकों में से प्रमुख त्राटक मुर्तीत्राटक के बारे में जानेंगे.

मुर्तीत्राटक जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि किसी मूर्ति अथवा किसी पत्थर पर त्राटक करने को मुर्तीत्राटक कहा जाता है. आमतौर पर मुर्तीत्राटक के अभ्यास में करीब 3 से 4 इंच लंबी मूर्ति का प्रयोग किया जाता है और यदि मूर्ति ना हो तो इतने ही बड़े किसी चित्र का प्रयोग भी किया जा सकता है.

लेकिन त्राटक के अंतर्गत इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वह चित्र रंगीन ना हो, जी हां! वह चित्र ‘ब्लैक एंड वाइट’ होना चाहिए. तभी आपका त्राटक अच्छे तरीके से हो पायेगा और जब आपको इस प्रकार की मूर्ति अथवा चित्र मिल जाता है तब आप उसे किसी विशेष स्थान रख दे अथवा स्थापित कर दें तथा 3 या 4 फिट की दूरी पर आसान जमाकर बैठ चाहिए. इस बात का ध्यान रखें कि मूर्ति या चित्र आपकी आंखों के सामने होना चाहिए.

मूर्ति त्राटक के अभ्यास में साधक को मूर्ति या चित्र की आंखों में देखते हुए त्राटक का अभ्यास करना चाहिए या कहें की बिना पलके झपकाए जहां तक तक हो सके, उस मूर्ति अथवा चित्र की आंखों में देखने का अभ्यास करना चाहिए और जब आप की आंखों में पानी आ जाए तो कुछ समय आंखें बंद करके विश्राम कर लेना चाहिए.

मुर्तीत्राटक की एक विशेषता यह भी है कि इसमें जहां खुली आंखों से मूर्ति की आंखों पर त्राटक किया जाता है, वही आंख में पानी आने के बाद आंखों को विश्राम देकर आंखें बंद कर उस मूर्ति को अपने ध्यान में लाकर त्राटक किया जाता है तथा इस प्रकार का त्राटक साधक को प्रतिदिन 20 से 25 बार करना चाहिए.

शुरु-शुरु में मूर्ति पर ध्यान लगाने में दिक्कत हो सकती है. परंतु कुछ दिनों के अभ्यास के बाद साधक आसानी से मूर्ति पर त्राटक कर सकता है तथा आंख बंद करके ध्यान में भी उसके बिंब पर तराटक कर सकता है. हो सकता है कि शुरु-शुरु में यह मूर्ति केवल कुछ सेकंड तक ही आंखों के सामने रुके. परंतु साधक को अभ्यास करते रहना चाहिए तथा वह देखेगा की अभ्यास के कारण कुछ समय के पश्चात वह मूर्ति काफी देर तक आंखो के सामने स्थित रहती है.

वास्तव में मुर्तीत्राटक बहुत ही लाभदायक और जरूरी त्राटक है. क्योंकि सबसे पहले तो इससे हमारी आंखों का तेज बढ़ता है. दूसरा, सम्मोहन शक्ति बढ़ती है. तीसरा, हमारा ध्यान मजबूत होता जाता है तथा आप ध्यान के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते चले जाते हैं तथा चौथा, आंखें बंद करके मूर्ति को सामने देख कर उस पर त्राटक करने से तीसरा नेत्र खोलने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है. इसी कारण मुर्तीत्राटक बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है.

जब आप आंखें बंद कर मूर्ति पर त्राटक करते हैं तो आपको कई प्रकार के दृश्य दिखाई दे सकते हैं. लेकिन धीरे-धीरे अभ्यास के बाद यह दृश्य स्थिर होते चले जाते हैं तथा हम अपनी इच्छा से जो भी दृश्य देखना चाहें देख सकते हैं. इस प्रकार के दृश्यों को देखना ही तीसरा नेत्र जागरण कहलाया जाता है.

यह त्राटक इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें तीसरा नेत्र को जागृत होता ही है. इसके साथ ही साथ हम ध्यान में ही किसी को सम्मोहित करने की क्षमता प्राप्त कर लेते हैं. इसलिए साधक को चाहिए कि मूर्ति पर काफी समय तक अभ्यास होने के पश्चात वह अन्य देखी हुई वस्तुओं को भी अपने ध्यान में लाने की कोशिश करें तथा आंखें बंद करके वह ध्यान मे टिकी रहे इसका भी अभ्यास करते रहना चाहिए.

 

 

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पुनीत राठौर, www.gyanpanti.com वेबसाइट के एडमिन हैं और यह Ad Agency में बतौर आर्ट डायरेक्टर कार्यरत हैं. इन्हें नयी-नयी जानकारी हासिल करने का शौक हैं और उसी जानकारी को आपके पास पहुचाने के लिए ही है ब्लॉग बनाया गया हैं. आप हमारी पोस्ट को शेयर कर इन जानकारियों को बाकी लोगो तक पहुचाने में हमारी सहायता कर सकते हैं.

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