जाने, सबसे ठंडे युद्धक्षेत्र सियाचिन में सेना कैसे करती है हमारी रक्षा

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Indian Army At Siachen Glacier, Hindi

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दुनियां का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र कौन सा हैं, दुनियां का सबसे ठंडा युद्ध क्षेत्र कौन सा है, कैसे करती है ग्रेट भारतीय सेना सियाचिन युद्धक्षेत्र में हमारी रक्षा| आइये इन्ही सब सवालों के जवाब जानते हैं इस पोस्ट में… पसंद आये तो इस पोस्ट को शेयर करना न भूले

एक ओर जहां पूरा देश चैन की नींद सोता है, वहीं दूसरी ओर भारतीय सेना के जवान सियाचिन ग्लेशियर जैसी खतरनाक जगहों पर मुश्तैदी से तैनात रहते हैं, जहां यह तैनात रहते हैं वहां की हवा आदमखोर कहलाती है। पारा माइनस 50 डिग्री से कम रहता है और यह इस तापमान से जूझने वाले सुपरमैन कहलाते हैं। जी हां यही कहानी है सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात रहने वाले भारतीय जवानों की। आइए जानते है इन बहादुर जवानों के बारे में जो मौत से जूझते रहते हैं ताकी हम सुरक्षित रह सकें।

Indian Army at siachen glacier in Hindi :

 

सियाचिन ग्लेशियर या सियाचिन हिमनद हिमालय पूर्वी कराकोरम रेंज में भारत-पाक नियंत्रण रेखा के पास उत्तर पर स्थित है। सामरिक रुप से यह भारत और पाकिस्तान के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है। इस पर सेनाएँ तैनात रखना दोनों ही देशों के लिए महंगा सौदा साबित होता है। सियाचिन में भारत के 10 हजार सैनिक तैनात हैं और इनके रखरखाव पर प्रतिदिन 5 करोड़ रुपये का खर्च आता है।
क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण

सियाचिन सबसे ऊंचाई पर स्थित है। यहां पाकिस्‍तान और चीन दोनों की सीमा भारत के साथ मिलती है। दोनों देश से हमें आये दिन खतरा बना रहता है। पाक और चीन की सेना लगातार भारत की सीमा पर घुसपैठ की कोशिश में लगी रहती है। थोड़ी सी चुक से भारत संकट में पड़ सकता है। इसलिए यहां सैनिक चौकन्‍ने रहते।

 

पारा -50 के करीब पहुंच जाता है

पारा -50 के करीब पहुंच जाता है। इतनी ठंढ़ के बीच भारत के जवान वहां पूरी मुस्‍तैद के साथ डटे रहते हैं। सियाचिन ग्‍लेशियर पर स्थित भारतीय सीमा की रक्षा के लिए 3 हजार सैनिक हमेशा तैनात रहते हैं। पाकिस्‍तान सियाचिन पर हमेशा से अपना दावा करते आया है।

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Indian Army At Siachen Glacier, Hindi

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जवानों का जीना भी है मुश्किल

जवानों की पल्टन की तैनाती तीन-तीन माह के लिए की जाती है। इन तीन माह में यह नहाने से एकदम दूर रहते हैं। क्योंकि नहाने के लिए यदि बहादुरी दिखाने की कोशिश की तो शरीर का कोई ना कोई अंग गलकर वहीं गिर जाएगा। खाना भरपूर रहता है पर यह जानते हैं कि खाने के बाद उन्हें कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। बर्फीले हवाएं इन्हें निगलने के लिए हर पल इनके सिर पर मंडराती रहती हैं।

 

मौत सिर पर मंडराती रहती है

बर्फ के नीचे सैनिक दफन होते हैं और उनकी बर्फ में ही कब्र बन जाती है। इसके बाद भी यहां सैनिक मुस्तैदी से हर पल तैनात रहते हैं। मौसम से लड़ते हैं और पाकिस्तान से होनी वाली घुसपैठ पर भी नजर रखते हैं। बहुत कम पल्टन ऐसी होती हैं जिसमें उतने सैनिक ही वापस लौट आए जितने सियाचिन पर मोर्चा संभालने पहुंचते हैं।

 

मौत की खबर भी कई दिनो बाद आती है

यहां तैनात सैनिकों के सिर पर कोई ताज नहीं होता। इनके जान गंवाने की खबर भी सैनिकों के परिजनों तक चिट्ठी से पहुंचती है। इसका खाका हर भाषा में तैयार रहता है क्योंकि सैनिक के परिजनों की भाषा अलग-अलग होती है। बस सैनिक का नाम और नंबर खाली रहता है, जिसे सैनिक के जान गंवाने के बाद रिक्त स्थान में लिख दिया जाता है।

 

ऐसे करते हैं गश्त

यह पांच-पांच की संख्या में बर्फ पर कमर में रस्सी बांधकर गश्त करते हैं। ताकि कोई एक खाई में जाए तो बाकी उसे बचा सकें पर कई बार यह पांच के पांचों ही बर्फ में समा जाते हैं, और इनके बर्फ में समाने की जानकारी जब तक मिलती है, तब तक इनके ऊपर कई फुट मोटी बर्फ जम चुकी होती है।

 

 

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GyanPanti Team

पुनीत राठौर, www.gyanpanti.com वेबसाइट के एडमिन हैं और यह Ad Agency में बतौर आर्ट डायरेक्टर कार्यरत हैं. इन्हें नयी-नयी जानकारी हासिल करने का शौक हैं और उसी जानकारी को आपके पास पहुचाने के लिए ही है ब्लॉग बनाया गया हैं. आप हमारी पोस्ट को शेयर कर इन जानकारियों को बाकी लोगो तक पहुचाने में हमारी सहायता कर सकते हैं.

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