जब चाणक्य ने सिखाया की क्या होती है राष्ट्र भक्ति

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Chanakya aur Rashtra Bhakti, Hindi

Chanakya aur rashtra bhakti story hindi

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चाणक्य के बारे में हर कोई जनता हैं तथा इन्हें दुनियां के सबसे महान रणनीतिक लोगो में भी शुमार किया जाता है| आज हर कोई एक दुसरे को राष्ट्रधर्म का उपदेश देता है लेकिन क्या हैं राष्ट्रभक्ति? क्या हैं राष्ट्रधर्म? कैसे पालन करना चाहिए राष्धर्म का? इन्ही सब सवालों के जवाब आज हम जानेंगे इस पोस्ट में।

राष्ट्रधर्म का पालन हर वयक्ति को करना चाहिए। राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि माना गया है, भगवान कृष्ण ने भी इसे सबसे महान बताया है। क्या है राष्ट्रधर्म? आचार्य चाणक्य के शब्दों में जानिए एक कहानी के माध्यम से।

सम्राट चंद्रगुप्त अपने मंत्रियों के साथ एक विशेष मंत्रणा में व्यस्त थे कि प्रहरी ने सूचित किया कि आचार्य चाणक्य राजभवन में पधार रहे हैं । सम्राट चकित रह गए । इस असमय में गुरू का आगमन ! वह घबरा भी गए । अभी वह कुछ सोचते ही कि लंबे – लंबे डग भरते चाणक्य ने सभा में प्रवेश किया ।

सम्राट चंद्रगुप्त सहित सभी सभासद सम्मान में उठ गए । सम्राट ने गुरूदेव को सिंहासन पर आसीन होने को कहा । आचार्य चाणक्य बोले – ” भावुक न बनो सम्राट , अभी तुम्हारे समक्ष तुम्हारा गुरू नहीं , तुम्हारे राज्य का एक याचक खड़ा है , मुझे कुछ याचना करनी है । ” चंद्रगुप्त की आँखें डबडबा आईं । बोले – ” आप आज्ञा दें , समस्त राजपाट आपके चरणों में डाल दूं । ” चाणक्य ने कहा – ” मैंने आपसे कहा भावना में न बहें , मेरी याचना सुनें । ” गुरूदेव की मुखमुद्रा देख सम्राट चंद्रगुप्त गंभीर हो गए । बोले – ” आज्ञा दें । ” चाणक्य ने कहा – ” आज्ञा नहीं , याचना है कि मैं किसी निकटस्थ सघन वन में साधना करना चाहता हूं । दो माह के लिए राजकार्य से मुक्त कर दें और यह स्मरण रहे वन में अनावश्यक मुझसे कोई मिलने न आए । आप भी नहीं । मेरा उचित प्रबंध करा दें । ”

चंद्रगुप्त ने कहा – ” सब कुछ स्वीकार है । ” दूसरे दिन प्रबंध कर दिया गया । चाणक्य वन चले गए । अभी उन्हें वन गए एक सप्ताह भी न बीता था कि यूनान से सेल्युकस ( सिकन्दर का सेनापति ) अपने जामाता चंद्रगुप्त से मिलने भारत पधारे । उनकी पुत्री का हेलेन का विवाह चंद्रगुप्त से हुआ था । दो – चार दिन के बाद उन्होंने चाणक्य से मिलने की इच्छा प्रकट कर दी । सेल्युकस ने कहा – ” सम्राट , आप वन में अपने गुप्तचर भेज दें । उन्हें मेरे बारे में कहें । वह मेरा बड़ा आदर करते है । वह कभी इन्कार नहीं करेंगे ।

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GyanPanti Team

पुनीत राठौर, www.gyanpanti.com वेबसाइट के एडमिन हैं और यह Ad Agency में बतौर आर्ट डायरेक्टर कार्यरत हैं. इन्हें नयी-नयी जानकारी हासिल करने का शौक हैं और उसी जानकारी को आपके पास पहुचाने के लिए ही है ब्लॉग बनाया गया हैं. आप हमारी पोस्ट को शेयर कर इन जानकारियों को बाकी लोगो तक पहुचाने में हमारी सहायता कर सकते हैं.

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