नागचंद्रेश्वर मंदिर – अद्भुत मंदिर जो साल में सिर्फ एक बार ही खुलता है

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Amazing Nagchandreshwar Temple, Ujjain

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भारत के अद्भुत मंदिर, क्या है चमत्कारी नागचंद्रेश्वर मंदिर का राज, कैसा है यह सर्पमंदिर… इन्ही सब सवालो के जवाब हम जानेंगे इस इस पोस्ट में…

सनातन धर्म में मंदिरों का बहुत महत्व है। मंदिरों को परमात्मा का निवास कहा जाता है। हर कोई अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मंदिर में जरूर जाते हैं। वैसे तो मंदिर हमेशा खुले रहते हैं। पर यह मंदिर अनोखा है यह सिर्फ साल में एक दिन ही खुलता है। आईये जानते हैं क्यों।।

हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है। हिंदू परंपरा में नागों को भगवान का आभूषण भी माना गया है। भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का,जो की उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्तिथ है। इसकी खास बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में मौजूद रहते हैं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है , इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं। कहते हैं यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है।

माना जाता है कि पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें विष्णु भगवान की जगह भगवान भोलेनाथ सर्प शय्या पर विराजमान हैं। मंदिर में स्थापित प्राचीन मूर्ति में शिवजी, गणेशजी और माँ पार्वती के साथ दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित हैं। शिवशंभु के गले और भुजाओं में भुजंग लिपटे हुए हैं।

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GyanPanti Team

पुनीत राठौर, www.gyanpanti.com वेबसाइट के एडमिन हैं और यह Ad Agency में बतौर आर्ट डायरेक्टर कार्यरत हैं.
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