पंचतंत्र की कहानियां : व्यापारी और झूठ | Panchtantra Story in Hindi

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Panchtantra Stories in Hindi | Vyapari aur Jhuth

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पंचतंत्र की कहानियां : व्यापारी और झूठ | Children Story in Hindi : एक गरीब व्यापारी छोटे कस्बे में रहता था. उसने सोचा कि वह दूर देशों में जाकर अपनी किस्मत अजमाए और हो सकता है कि वह वहां ज्यादा धन कमा सके. यह सोचकर उस ने अपनी छोटी सी बची हुई चीजें इकट्ठा करके बाँध ली.

उस व्यापारी के पास एक लोहे की बड़ी तराजू भी थी. यह तराजू बहुत भारी और असली लोहे की बनी हुई थी. उसने उस तराजु को गिरवी रखने वाले सेठ के पास ले गया. गिरवी रखने वाले सेठ ने कुछ धन देकर वह तराजु ले ली. व्यापारी ने उससे कहा – “सेठ, कृपया मेरी तराजू को संभाल कर रखना. यह मेरे खानदान की निशानी है. मैं इसे सिर्फ कुछ धन पाने की इच्छा से गिरवी रख रहा हूं. जैसे ही मेरे पास धन इकट्ठा हो जाएगा मैं वापस आऊंगा और तुम्हारे पैसे वापस करके तराजु ले लूंगा”. गिरवी रखने वाले सेठ ने कहा – “ठीक है! मैं इसे संभाल कर रखूंगा.

व्यापारी अपने रास्ते चला गया. जैसे-जैसे समय गुजरता गया. वह दूर देशों में घूमा और बहुत मेहनत करने लगा. उसने कई प्रकार के व्यापार किए. उसकी किस्मत चमकी और उसने खूब धन कमा लिया. वह एक अमीर आदमी बन गया और एक सुंदर शहर में अपने लिए एक अच्छा सा मकान भी खरीद लिया. अब उसने अपने पुराने घर जाने का ख्याल आया. उसे अपनी तराजू भी वापस लेनी थी.

वह सीधा तराजू गिरवी रखने वाले सेठ की दुकान पर पहुंचा. गिरवी रखने वाला सेठ उस गरीब व्यापारी को शानदार कपड़ो में देख कर हैरान हुआ और उसकी आंखें खुली की खुली रह गई. व्यापारी ने उसे मुस्कुरा कर पूछा – “क्या तुम मुझे पहचानते हो? मैं तुम्हारे पास अपनी खानदानी अनमोल तराजू छोड़ गया था और तुमने मेहरबानी करके उसके लिए कुछ रुपए भी दिए थे
. अब मैं तुम्हारा सारा धन वापस करके अपनी तरह जो वापस लेने आया हूं”.

गिरवी रखने वाले सेठ ने दुख भरी आवाज से कहा – “मैंने तुम्हारी तराजू अपने स्टोर रूम में संभालकर रख दी थी. पर चूहों ने उस पर हमला बोल दिया और सारी तराजू खा गए”. अब व्यापारी उस सेठ की झूठी बातों को सुनकर उदास हो गया, पर उसने अपना गुस्सा नहीं दिखाया. वह बोला – “तुम्हारे यहां बहुत ही ताकतवर चूहे होंगे जो लोहे की तराजू खा गए. खैर! कोई बात नहीं मैं अब वापस जा रहा हूं. पर मैं जाने से पहले नदी में नहाना चाहता हूं. क्या आप लड़के को अपने लड़के को मेरे साथ तोलिया और साबुन देकर भेज सकते हैं”. सेठ बोला – “हां-हां, क्यों नहीं भेज सकता?”.

सेठ का लड़का और व्यापारी साथ-साथ नदी गए और वहां जाकर व्यापारी ने पास वाली गुफा में लड़के को धकेल दिया और गुफा का दरवाजा बड़े पत्थर से ढक दिया. व्यापारी नदी में नहा कर तरोताजा हो गया और शीघ्रता से गिरवी रखने वाले सेठ के पास पहुंचा और कहां – “मैं अब नदी में नहा कर बिल्कुल तरोताजा हो गया हूं, अब मैं अपने घर वापस जा रहा हूं. तुम्हें मैं विदा कहने आया हूं”. तभी सेठ बोला – “लेकिन मेरा लड़का कहां है?”. व्यापारी बोला “हे भगवान! जब मैं नदी में नहा रहा था, तभी एक बाज नीचे आया और आपके लड़के को उठाकर ले गया”.

सेठ चिल्लाया – “अरे, एक बाज इतने बड़े लड़के को उठाकर कैसे ले जा सकता है? जरूर तुम सरासर झूठ बोल रहे हो”. व्यापारी बोला – “यदि चूहे लोहे की तराजू खा सकते हैं, तो बाज भी अपनी चोंच में लड़के को पकड़ कर ले जा सकता है. लेकिन अगर तुम मेरी तराजू मुझे वापस कर दो तो, मैं तुम्हारे लड़का भी वापस कर दूंगा”. अब सेठ गुस्से में बोला – “पर, वह सच में ही तुम्हारी तराजू खा गए हैं”. व्यापारी बोला – “तो इसी तरह बाज भी तुम्हारे लड़के को उठाकर मेरी आंखो के सामने ले गया है”.

अब सेठ बोला – “मैं तुम्हें कचहरी तक ले जाऊंगा, जब न्यायाधीश तुम्हारा झूठ सुनेगा.. तब तुम्हें बहुत सजा मिलेगी”. लेकिन व्यापारी सेठ की यह बात सुनकर बिल्कुल भी नहीं डरा और उसने कहा – “आओ चलें”.

जब न्यायाधीश ने गिरवी रखने वाले व्यापारी की बात सुनी. तब वह व्यापारी से गुस्से में बोला – “क्या, कभी बाज भी लड़के को उठा कर ले जा सकता है, यह तो सरासर झूठ है”. तब व्यापारी बोला – “हां जी, यह उसी तरह से झूठ है, जैसे चूहों का लोहे की तराजू को खाना”. जज ने पूछा – “इसका क्या मतलब है?”. तब व्यापारी ने उसे सारी कहानी सुनाई – “बहुत साल पहले मैं इसके पास अपने कीमती तराजू रखकर कुछ धन ले गया था. वह तराजू हमारे परिवार मैं वर्षों से था. लेकिन अब मैंने काफी धन कमा लिया है तो मैं अपनी तराजू वापस लेने आया हूं, लेकिन यह कह रहा है कि तराजू को तो चूहे खा गए”.

जज उनकी यह बात सुनकर हंसा और गिरवी रखने वाले सेठ से बोला – “तुम इसकी तराजू वापस कर दो, तुम्हें अपना लड़का भी मिल जाएगा”. और बाद में जब व्यापारी तराजू के साथ अपने घर वापस जा रहा था तो वह मुस्कुराया और सोचने लगा “गिरवी रखने वाले सेठ की समझ में भी आ गया होगा कि एक झूठ बोलने पर कभी-कभी व्यक्ति झूठ में इतना फंस जाता है कि वह सोचता है कि काश वह सच बोल देता.

 

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GyanPanti Team

पुनीत राठौर, www.gyanpanti.com वेबसाइट के एडमिन हैं और यह Ad Agency में बतौर आर्ट डायरेक्टर कार्यरत हैं. इन्हें नयी-नयी जानकारी हासिल करने का शौक हैं और उसी जानकारी को आपके पास पहुचाने के लिए ही है ब्लॉग बनाया गया हैं. आप हमारी पोस्ट को शेयर कर इन जानकारियों को बाकी लोगो तक पहुचाने में हमारी सहायता कर सकते हैं.

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