जाने, राजा भोज के शहर ‘भोपाल’ के 17 फेमस टूरिस्ट प्लेस के बारे में

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Famous Tourist Places in Bhopal

Bhopal tourist place

भोपाल के 17 फेमस टूरिस्ट प्लेस | Famous Tourist Places in Bhopal : भोपाल एक ऐतिहासिक शहर है जिसे झीलों का शहर भी कहा जाता है. भोपाल में किले, मंदिर, मस्जिद इत्यादि घूमने की इतनी जगह है कि यह अपने आप में एक टूरिस्ट स्पॉट बन चुका है. हम आप को इनमें से कुछ सबसे फेमस टूरिस्ट स्पॉट्स की जानकारी बता रहे हैं. आइए जानते हैं
भोपाल का इतिहास और इसके प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट के बारे में :

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भोपाल का संक्षिप्त इतिहास

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी है, जिसे झीलों का शहर भी कहते हैं. भोपाल को राजा भोज ने 1000 से 1055 के बीच में बसाया था. राजा भोज परमार वंश से संबंधित थे. बाद के समय में आधुनिक भोपाल की नीव दोस्त मोहम्मद खान ने 18 वीं सदी के दौरान रखी, इसके बाद इस शहर पर नवाबों का शासन हो गया और हमीदुल्लाहवह खान भोपाल के आखिरी शासक बने और साल 1949 में औपचारिक रूप से इसका भारतीय संघ में विलय कर दिया गया.

 

#1. ढाई सीढ़ी मस्जिद

एशिया की सबसे छोटी मस्जिद ‘ढाई सीढ़ी’ यहीं है। किला फतेहगढ़ के बुर्ज के ऊपरी हिस्से में करीब 300 साल पहले भोपाल शहर के संस्थापक दोस्त मोहम्मद खान ने बनवाई थी, ताकि बुर्ज पर मौजूद सिपाही पहरेदारी के दौरान ही नमाज पढ़ सकें। यहां दो बुर्ज थे, दोस्त मोहम्मद खान के कहने पर पहरेदारों ने छोटे बुर्ज पर छोटी सी मस्जिद बनाई। पहरेदार कुशल कारीगर नहीं थे, तो उन्होंने दो सीढ़ी तो सही बना दी लेकिन तीसरी सीढ़ी पर एक ईंट ही लग सकी। तब से इसका नाम ढाई सीढ़ी वाली मस्जिद पड़ गया।

 

Bhopal tourist place

#2. अपर लेक (बड़ी झील)

भोपाल का सबसे मशहूर टूरिस्ट अट्रैक्शन है अपर लेक। जो देश की सबसे पुरानी मैन मेड लेक है। 11 वीं सदी में बनी इस झील को बड़ा तालाब भी कहते हैं। राजा भोज ने इसे बनाने का आदेश दिया था और माना जाता है कि इस झील के पानी से ही राजा की स्किन की बीमारी ठीक हो गई थी। ऐसी कहानी प्रचलित है कि राजा भोज को कुष्ठ रोग था। किसी साधु ने 365 पानी के स्त्रोतों का एक तालाब बनाकर उसमें नहाने को कहा। साधु की बात मानकर राजा भोज ने अपने सैनिकों को काम पर लगा दिया। इन सैनिकों ने एक ऐसी घाटी का पता लगाया, जो बेतवा नदी के मुहाने स्थित थी। लेकिन यहां केवल 356 पानी के सोर्स थे। तब ‘कालिया’ नाम के एक गोंड ने पास की एक नदी की जानकारी दी, जिसकी कई सहायक नदियां थीं। इन सबको मिलाकर संत के द्वारा बताई गई संख्या पूरी होती थी। इस गोंड मुखिया के नाम पर इस नदी का नाम ‘कालियासोत’ रखा गया, जो आज भी भोपाल में मौजूद है।

बेतवा नदी का पानी इस विशाल घाटी को भरने के लिए पर्याप्त नहीं था। इसलिए इस घाटी से लगभग 32 किलोमीटर पश्चिम में बह रही एक अन्य नदी को बेतवा घाटी की ओर मोड़ने के लिए एक बांध बनाया गया। यह बांध आज के भोपाल शहर के नजदीक भोजपुर में बना था। इसके बाद बड़ा तालाब अस्तित्व में आया, जिसका नाम ‘भोजपाला’ रखा गया। कहा जाता है कि किसी समय बड़े तालाब में कई सुन्दर द्वीप थे।
होशंगशाह ने तुड़वा दिया था राजा भोज का बांध

बाद में 14 वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा बनाए गए बांध को होशंगशाह ने तुड़वा दिया था। उस वक्त के बड़े तालाब के साइज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बांध के टूटने के बाद भी तालाब को पूरा सूखने में 30 साल लगे। तालाब की सूखी जमीन पर आज बसाहट है। तालाब का एक हिस्सा सूखने के बावजूद भोपाल में कमला पार्क के पास जो मिट्टी का बांध था, वह बच गया। उसके कारण एक छोटा तालाब शेष रह गया, जिसे आज बड़ा तालाब कहते हैं। 1694 में नवाब छोटे ख़ान ने बड़े तालाब के पास बाण गंगा पर एक बांध बनवाया, जिसके कारण छोटा तालाब अस्तित्व में आया। यह दोनों तालाब आज भी भोपाल में मौजूद हैं। यदि आप यहां घूमने जा रहे हैं तो बोटिंग का मजा जरुर लें। यहां आप क्रूज, स्पीड बोट, पैडल बोट की सैर कर सकते हैं।

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GyanPanti Team

पुनीत राठौर, www.gyanpanti.com वेबसाइट के एडमिन हैं और यह Ad Agency में बतौर आर्ट डायरेक्टर कार्यरत हैं. इन्हें नयी-नयी जानकारी हासिल करने का शौक हैं और उसी जानकारी को आपके पास पहुचाने के लिए ही है ब्लॉग बनाया गया हैं. आप हमारी पोस्ट को शेयर कर इन जानकारियों को बाकी लोगो तक पहुचाने में हमारी सहायता कर सकते हैं.

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